अगर आपके घर के सदस्यों में भी है ये आदतें तो हो जाइये सावधान !

कहते हैं ना, महान आचार्य चाणक्य जीवन दर्शन के ज्ञाता थे. आचार्य चाणक्य के जीवन पर गौर करने पर पता चलता है कि उन्होंने अपने जीवन में जो भी अनुभव प्राप्त किए, जिन नियमों का निर्माण किया, आखिर में  उन्हीं का उपदेश देकर वे इतिहास में अमर हो गए. अपने इसी काम के चलते वो आज भी लोगों को प्रेरणा देते हैं. जानकारी के लिए बता दें कि आचार्य चाणक्य एक महान शिक्षक भी थे. ऐसे में हम आज आपको उनके द्वारा दिए गए कुछ उपदेशों से रूबरू कराने जा रहे हैं.

आचार्य चाणक्य एक ज्ञानी के साथ-साथ एक अच्छे नीतिकार भी थे उन्होंने मनुष्य जीवन को सुखमय बनाने के लिए बहुत सी ऐसी बातें बताई थी. अगर मनुष्य इन नीतियों का पालन कर ले  तो वह कभी असफल नहीं होता और वह संसार की कठिन से कठिन परिस्थितियों का भी सामना कर सकता है. आज हम आपको आचार्य चाणक्य के द्वारा बताए गए ऐसे चार लोगों के बारे में बताने जा रहे है जो आपके सबसे बड़े शत्रु हो सकते हैं तो चलिए जानते है इनके बारे में –

व्यभिचारिणी माता
वैसे तो किसी स्त्री को अपने पति के सिवा किसी अन्य पुरुष से संबंध नहीं बनाना चाहिए अगर कोई स्त्री अपने पुत्र होने के बाद  भी ऐसा दुष्कर्म करती है तो वह अपने पुत्र के लिए शत्रु के समान होती है और ऐसे में उस पुत्र को समाज में अपमान का सामना करना पड़ता है. ऐसी माता अपने पुत्र की ही सबसे बड़ी शत्रु होती है.

ऋण करने वाला पिता
आचार्य चाणक्य कहते हैं कि ऋण या उधार तभी लेना चाहिए जब आप उसे चुकाने की हिम्मत हो. भविष्य में आने वाली हानि में धन के भरोसे पर कभी भी किसी से उधार नहीं लेना चाहिए, जो पिता उधार लेता है और उसे चुकाने में असमर्थ होता है वह उसका बोझ अपने पुत्र यह परिवार पर डाल देता है ऐसा पिता भी शत्रु के समान ही होता है.

रूपवान पत्नी
जो स्त्री रूपवान होने के बावजूद भी हमेशा अपने रुप की चिंता करती रहती है. वह अपनी संतान की तरफ ज्यादा ध्यान नहीं देती और वह ज्यादातर समय सजने संवरने पर ही लगा देती है और घर के सदस्यों को दुर्लक्षित कर देती है. अतः चाणक्य कहते हैं ऐसी स्त्री जो रूपवान हो और हमेशा अपने रूप को निहारने मैं अपना समय गवाती हो वह अपने घरवालों के लिए शत्रु के समान होती है.

मूर्ख अज्ञानी पुत्र
चाणक्य कहते है मूर्ख पुत्र परिवार के लिए शत्रु के समान होता है जो पुत्र अज्ञानी हो और शिक्षा प्राप्त करने से दूर भागता हो, वह भविष्य में घर पर संकट ला सकता है. ऐसा पुत्र पिता के कमाए हुए धन को खर्च करने के सिवाय और कुछ सोचता ही नहीं है वह हमेशा ही अपने परिवार वालों का निर्भर रहते हैं .ऐसे पुत्र को यदि समय पर शिक्षा नहीं दी गई तो वह आगे चलकर परिवार वालों के लिए दुख का कारण बन सकते हैं.

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