आगरा के इस आदमी का हुआ पुनर्जन्म सुनाई ऐसी कहानी  जिसे सुनकर आपके भी उड़ जाएंगे होश

पुनर्जन्म को लेकर कई प्रकार की भ्रांतियां फैली हुई है सनातन धर्म के अनुसार आत्मा का पुनर्जन्म होता है और वो इस जन्म-मरण के चक्कर से तब तक आजाद नहीं होती. तब तक की उसकी ईश्वर के पास जाने का मार्ग प्रशस्त न हो जाये लेकिन वहीं इस्लाम में कहा गया की आत्मा का पुनर्जन्म नहीं होता है. इस पर बहस वर्षों से चली आ रही है की पुनर्जन्म होता है या नहीं लेकिन आज हम आपको पुनर्जन्म की सच्ची घटना से अवगत करवा रहे हैं. जिसे सुनकर आपको हैरानी होगी.

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आपको बता दें कि दिल्ली में रहने वाले महावीर प्रसाद एक शिक्षक हैं और उनके तीन बेटे हैं. सबसे छोटे बेटे का नाम तोरण सिंह है लेकिन घर में सब उसे टीटू बुलाते हैं.  महावीर प्रसाद ने बताया की टीटू बचपन से ही गहरी सोच में डूबा हुआ रहता था और बच्चों के साथ खेलता भी नहीं था. एक दिन अचानक उसने कहा की आप मेरा पिता नहीं है और ना ही आपकी पत्नी मेरी माँ है, मेरा नाम सुरेश वर्मा है और में आगरा के पास स्थित बाद गांव का रहने वाला हूँ.  आगरा में मेरी सुरेश रेडियोज नाम की दुकान है और मेरे दो बेटे हैं रोनू और सोनू.  यह सुनकर महावीर प्रसाद और उनकी पत्नी हैरान रह गए की जिसने आज तक आगरा का नाम तक नहीं सुना वो यह क्या बोल रहा है.

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आपको बता दें कि टीटू जिद्द करने लगा की वो अपने घर जाना चाहता है और अब वो एक दिन भी यहां नहीं रहेगा.  टीटू के परिवार वाले काफी परेशान होने के बाद उन्होंने फैसला किया की वो आगरा में सुरेश रेडियोज नाम की दूकान का पता करेंगे.  टीटू का बड़ा भाई और उसका दोस्त आगरा के लिए निकल गए और काफी जगह ढूंढने के बाद सदर बाजार में उनकी आँखों के सामने वही दुकान थी जिसका जिक्र टीटू ने किया था.  टीटू का भाई उस दुकान पर पहुंचा तो देखा की एक औरत उस दुकान में बैठी थी जो की सुरेश वर्मा की पत्नी थी.  सुरेश की पत्नी उमा से बातचीत करने पर पता चला की सुरेश की 1986 में हत्या हो गयी थी. टीटू के भाई ने बताया की यही बात उसका छोटा भाई करता है की उसका क़त्ल कर दिया गया था.

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सुरेश की पत्नी और माता-पिता भी टीटू के पास मिलने गए तो वो मुस्कुराने लग गया और एक-एक कर सबको पहचान लिया. जब उसे अपनी बहन का नाम पूछा तो उसने वह भी बड़ी आसानी से बता दिया यह सब जानकर सब दंग रह गए.  टीटू को आगरा लाया गया तो वो अपनी दुकान में ऐसे घूमने लगा की बरसों से यहां काम कर रहा हो.  उसने वह जगह भी बताई जहां उसने पैसे रखे थे टीटू ने बच्चों की भीड़ में रोनू और सोनू को भी पहचान लिया.  टीटू के शरीर पर भी ठीक वैसे ही निशान थे जैसे सुरेश की मृत्यु होने के बाद शरीर पर थे.

 

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