“सब मुस्लिम लड़के एक जैसे नहीं होते” ये कहके लड़की ने किया था हाफ़िज़ से निकाह फिर देखिए क्या हुआ

कहते हैं जैसे बेटे अपनी माँ के आँखों के तारे होते हैं वैसे ही बेटियां अपने पिता का सबकुछ होती हैं,लेकिन ज़रा उस पिता के बारे में सोचिये जिसे अपने बुढ़ापे में अपनी ही बेटी की लाश को कंधा देना पड़े. सिर्फ इतना ही नहीं किस्मत उस बाप से किस कदर रूठी थी इस बात का अंदाज़ा आप इसी बात से लगा लीजिये कि उसे सिर्फ अपनी बेटी की लाश को कंधा ही नहीं देना था बल्कि अपनी बेटी की लाश को पंचतत्व में विलीन करने के लिए उस अभागे बाप को भीख भी मांगनी पड़ी. आइये क्या है पूरी खबर आपको विस्तार से बताते हैं.

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मामला लखनऊ का है, जहाँ एक रिटायर्ड रेलवे कर्मी की बेटी की हुई मृत्यु के बाद उस बेटी की लाश के लिए सुबह से शाम तक एक पिता रोता बिलखता रहा. मिली जानकारी के अनुसार इस वृद्ध कर्मचारी की बेटी को उनके दामाद ने काफी समय पहले ही मायके भेज दिया था वो भी तीनों बच्चों के साथ. ऐसे में बताया जा रहा है कि इस वृद्ध इंसान की आर्थिक हालत इतनी खस्ता थी कि उन्हें अपनी बेटी के अंतिम संस्कार के लिए लोगों से भीख मांगकर पैसे इकट्ठे करने पड़े थे.

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जानकारी के लिए हम आपको बता दें कि पीड़ित रेलवे कर्मचारी का नाम शिवप्रकाश है. शिवप्रकाश की माने तो उनकी बेटी ने बहराईच के मुसलमान हाफिज से शादी कर ली थी. शुरुआत में सब सामान्य चला लेकिन शादी के आठ साल बाद शिवप्रकाश की बेटी नीलम को उसका पति मायके छोड़ गया. शिवप्रकाश ने रोते हुए बताया कि इस दामाद ने उनकी बच्ची की ज़िन्दगी तबाह करके रख दी थी. नीलम को जब मायके छोड़ा गया तो भी सब ठीक ही चल रहा था.

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बूढ़े शिवप्रकाश अपनी पेंशन से घर चला रहे थे और बेटी और नातिन के साथ खुश भी थे लेकिन बेटी की मौत ने सब कुछ बिगाड़ कर रख दिया. बताया गया कि बलरामपुर में मंगलवार तो तड़के सुबह तीन बजे नीलम ने दम तोड़ दिया. जिसके बाद उसके तीनो बच्चे शिवप्रकाश के गले लग कर देर तक रोते रहे. खबरों के मुताबिक जब नीलम की लाश को घर ले जाया गया तो पैसों की कमी के चलते उन्हें अंदर जाने से रोक दिया गया. जिसके चलते काफी समय तक तो शिवप्रकाश रात से सुबह तक लाश को गोद में लेकर घर के बाहर ही अपने तीनो नातिन के समेत बैठे रहे. पिछले कुछ महीने से पेंशन ना आने की वजह से आर्थिक तौर पर शिवप्रकाश टूट चुके थे. आखिरकार उन्होंने पुलिस से मदद मांगी और फिर उन्होंने अंतिम संस्कार के लिए 5 हजार रूपये इकट्ठे किये और बेटी को अंतिम विदाई दी.

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